खड़ा कर लहसुन, तेल, लोहा, काला वस्त्र, कंबल इत्यादि दक्षिणा
सहित दान दें
3) प्रात:काल के समय पीपल का पूजन कर तेल का
दीपक लगाकर परिक्रमा करें
4) हनुमान चालीसा तथा शनि चालीसा का
नित्य पाठ करें। मंगलवार तथा शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करें
5) पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए वर्षभर प्रत्येक शनिवार बहते
जल में पानी वाले नारियल, काले कपड़े में लोहा, काला तिल
बांधकर अपने पर से उतारकर शनि महाराज से प्रार्थना कर बहा दें
6) शनि मंत्र के जप करें या करवाएं।
मंत्र है- 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय
नम:।।'
या