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प्राणियों को 'कर्म-फल' कैसे मिलता है

प्राणियों को 'कर्म-फल' कैसे मिलता है

प्राणियों को 'कर्म-फल' कैसे मिलता है

े भले-बुरे कर्मों का विवरण प्रत्येक समय लिखते रहते हैं। मृत्यु के बाद प्राणी को इसी के आधार पर शुभ कर्मों के लिए स्वर्ग और दुष्कर्मों के लिए नर्क प्रदान किया जाता है।
3. उक्त वर्णन वास्तविक स्थिति का एक सांकेतिक सारांश मात्र है। जिसे जन - सामान्य सरलता से समझ कर तदनुसार दुष्कर्मों से दूर रहने का प्रयास कर सकें।
4. अब यह सर्वविदित वैज्ञानिक तथ्य है कि जो भी भले-बुरे कार्य ज्ञान वान प्राणियों द्वारा किए जाते हैं- उनका सूक्ष्म चित्रण अन्तःचेतना में होता रहता है। भले-बुरे कर्मों का "ग्रे मैटर" के परमाणुओं पर यह चित्रण पौराणिक चित्रगुप्त की वास्तविकता को सिद्ध कर देता है।

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शनि, वास्तु और सब रहेगा पॉजिटिव,

शनि, वास्तु और सब रहेगा पॉजिटिव,

शनि, वास्तु और सब रहेगा पॉजिटिव,

होती थी। आज भी गांव में
रहने वाले या ग्रामीण परिवेश से संबंधित लोगों के यहां
गाय रहती है।
प्राचीन काल से गाय को माता का दर्जा प्राप्त है। गाय
बहुत ही पवित्र और पूजनीय
मानी गई है। ऐसा माना जाता है कि गाय की
पूजा करने से सभी देवी-देवताओं
की कृपा प्राप्त हो जाती है।
इसी वजह से आज भी गाय को पूजा जाता
है। पहले गाय को घर में रखना अनिवार्य था इसके पीछे
कई कारण हैं।
- गाय जहां रहती है वहां किसी
भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय
नहीं हो पाती और सकारात्मक ऊर्जा
बढ़ती रहती है।

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अनहोनी टल सकती है।

मृत्यु का समय निकट आ जाता है तो उसके माथे पर चंदन का तिलक
लगाना चाहिए।
यदि यह तिलक जल्दी सूख जाता है तब तो समझना
चाहिए कि उस व्यक्ति का जीवन अभी शेष
है।
इसके विपरित यदि वह तिलक जल्दी नहीं
सूखता है तो दुर्भाग्यवश विपरित परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
यानि व्यक्ति की मृत्यु की संभावनाएं प्रबल
हो जाती हैं क्योंकि मृत्यु के समय व्यक्ति के माथे
की गर्मी सबसे पहले समाप्त हो
जाती है,
मस्तक एकदम ठंडा हो जाता है।
इस वजह से चंदन जल्दी नहीं सूख
पाता। यदि ऐसा होता है तो संबंधित व्यक्ति के स्वास्थ्य के संबंध में

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