दीपावली पूजन

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द‍िवाली पूजा का शुभ मुहूर्त

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल मुहूर्त 24 अक्टूबर शाम 06 बजकर 09 म‍िनट से 08 बजकर 04 म‍िनट तक। लक्ष्मी पूजा निशिता काल मुहूर्त रात 11बजकर 39 म‍िनट से 12 बजकर 31 म‍िनट तक। अमावस्या तिथि 4 नवंबर की सुबह 06 बजकर 03 म‍िनट से शुरू होकर 5 नवंबर की सुबह 02 बजकर 44 म‍िनट तक रहेगी।द‍िवाली पूजा की थाली में सबसे पहले मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा, रोली, कुमुकम, अक्षत (चावल), पान, सुपारी, नारियल, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, मिट्टी, दीपक, रूई, कलावा, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, धनिया, फल, फूल, जौ, गेहूं, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, पंचामृत, दूध, मेवे, खील, बताशे, जनेऊ, श्वेस वस्त्र, इत्र, चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, आसन, थाली. चांदी का सिक्का, चंदन, बैठने के लिए आसन, हवन कुंड, हवन सामग्री, आम के पत्ते और प्रसाद रख लें। इसके बाद उसमें 11 दीपक रखें।जब पूजन की थाली तैयार हो जाए करें ये काम
जब आपकी दीपावली पूजन की थाली तैयार हो जाए, तो उसे यजमान के सामने रखें। साथ ही ध्‍यान रखें क‍ि आपके परिवार के सदस्य आपकी बाईं ओर बैठें। कोई आगंतुक हो तो वह आपके या आपके परिवार के सदस्यों के पीछे ही बैठे। साथ ही एक और बात का व‍िशेष ध्‍यान रखें क‍ि पूजा स्थल में लक्ष्मी मां की दो मूर्तियां भूलकर भी न रखें। साथ ही लक्ष्मी मां की दो मूर्तियां आस-पास तो बिल्कुल ही नहीं रखनी चाहिए। ऐसा होने पर उस घर में कलह होती है। साथ ही घर में खंडित मूर्ति या मां लक्ष्मी का फटा हुआ चित्र नहीं रखना चाहिए। मान्‍यता है क‍ि यह वास्तु और ज्योतिष दोनों के हिसाब से ही ये अशुभ है।